Top Mir Taqi Mir Shayari Collection In Hindi

Mir Taqi Mir Shayari

 

Aag The Ibtida-e-ishq Men Ham
Ab Jo Hain Khaak Intiha Hai Ye

आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम
अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये

~ मीर तक़ी मीर



Ab To Jaate Hain But-kade Se ‘mir’
Phir Milenge Agar Khuda Laaya

अब तो जाते हैं बुत-कदे से ‘मीर’
फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया

~ मीर तक़ी मीर



Chashm Ho To Aaina-khana Hai Dahr
Munh Nazar Aata Hai Divaron Ke Biich

चश्म हो तो आईना-ख़ाना है दहर
मुँह नज़र आता है दीवारों के बीच

~ मीर तक़ी मीर



Dikha.i Diye Yuun Ki Be-khud Kiya
Hamen Aap Se Bhi Juda Kar Chale

दिखाई दिए यूँ कि बे-ख़ुद किया
हमें आप से भी जुदा कर चले

~ मीर तक़ी मीर



Hamare Aage Tira Jab Kisu Ne Naam Liya
Dil-e-sitam-zada Ko Ham Ne Thaam Thaam Liya

हमारे आगे तिरा जब किसू ने नाम लिया
दिल-ए-सितम-ज़दा को हम ने थाम थाम लिया

~ मीर तक़ी मीर



Hoga Kisi Divar Ke Saa.e Men Paḍa ‘mir’
Kya Kaam Mohabbat Se Us Aram-talab Ko

होगा किसी दीवार के साए में पड़ा ‘मीर’
क्या काम मोहब्बत से उस आराम-तलब को

~ मीर तक़ी मीर



Ishq Ik ‘mir’ Bhari Patthar Hai
Kab Ye Tujh Na-tavan Se Uthta Hai

इश्क़ इक ‘मीर’ भारी पत्थर है
कब ये तुझ ना-तवाँ से उठता है

~ मीर तक़ी मीर



Jam Gaya Khuun Kaf-e-qatil Pe Tira ‘mir’ Zi-bas
Un Ne Ro Ro Diya Kal Haath Ko Dhote Dhote

जम गया ख़ूँ कफ़-ए-क़ातिल पे तिरा ‘मीर’ ज़ि-बस
उन ने रो रो दिया कल हाथ को धोते धोते

~ मीर तक़ी मीर



Kin Nindon Ab Tu Soti Hai Ai Chashm-e-girya-naak
Mizhgan To Khol Shahr Ko Sailab Le Gaya

किन नींदों अब तू सोती है ऐ चश्म-ए-गिर्या-नाक
मिज़्गाँ तो खोल शहर को सैलाब ले गया

~ मीर तक़ी मीर



Le Saans Bhi Ahista Ki Nazuk Hai Bahut Kaam
Afaq Ki Is Kargah-e-shishagari Ka

ले साँस भी आहिस्ता कि नाज़ुक है बहुत काम
आफ़ाक़ की इस कारगह-ए-शीशागरी का

~ मीर तक़ी मीर



Mat Sahl Hamen Jaano Phirta Hai Falak Barson
Tab Khaak Ke Parde Se Insan Nikalte Hain

मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों
तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं

~ मीर तक़ी मीर



‘Mir’ Ham Mil Ke Bahut Khush Hue Tum Se Pyare
Is Kharabe Men Miri Jaan Tum Abad Raho

‘मीर’ हम मिल के बहुत ख़ुश हुए तुम से प्यारे
इस ख़राबे में मिरी जान तुम आबाद रहो

~ मीर तक़ी मीर



‘Mir’ Ke Diin-o-maz.hab Ko Ab Puchhte Kya Ho Un Ne To
Qashqa Khincha Dair Men Baitha Kab Ka Tark Islam Kiya

‘मीर’ के दीन-ओ-मज़हब को अब पूछते क्या हो उन ने तो
क़श्क़ा खींचा दैर में बैठा कब का तर्क इस्लाम किया

~ मीर तक़ी मीर



Mire Saliqe Se Meri Nibhi Mohabbat Men
Tamam Umr Main Nakamiyon Se Kaam Liya

मिरे सलीक़े से मेरी निभी मोहब्बत में
तमाम उम्र मैं नाकामियों से काम लिया

~ मीर तक़ी मीर



Nazuki Us Ke Lab Ki Kya Kahiye
Pankhuḍi Ik Gulab Ki Si Hai

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है

~ मीर तक़ी मीर



Patta Patta Buuta Buuta Haal Hamara Jaane Hai
Jaane Na Jaane Gul Hi Na Jaane Baaġh To Saara Jaane Hai

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है

~ मीर तक़ी मीर



Raah-e-duur-e-ishq Men Rota Hai Kya
Aage Aage Dekhiye Hota Hai Kya

राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
आगे आगे देखिए होता है क्या

~ मीर तक़ी मीर



Sirhane ‘mir’ Ke Ahista Bolo
Abhi Tuk Rote Rote So Gaya Hai

सिरहाने ‘मीर’ के आहिस्ता बोलो
अभी टुक रोते रोते सो गया है

~ मीर तक़ी मीर



Us Ke Faroġh-e-husn Se Jhamke Hai Sab Men Nuur
Sham-e-haram Ho Ya Ho Diya Somnat Ka

उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का

~ मीर तक़ी मीर



Yaad Us Ki Itni Khuub Nahin ‘mir’ Baaz Aa
Nadan Phir Vo Ji Se Bhulaya Na Ja.ega

याद उस की इतनी ख़ूब नहीं ‘मीर’ बाज़ आ
नादान फिर वो जी से भुलाया न जाएगा

~ मीर तक़ी मीर

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