Top Faiz Ahmad Faiz Shayari Collection In Hindi

Faiz Ahmad Faiz Shayari

Faiz Ahmad Faiz Shayari

 

Aaye To Yuun Ki Jaise Hamesha The Mehrban
Bhule To Yuun Ki Goya Kabhi Ashna Na The

आए तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबान
भूले तो यूँ कि गोया कभी आश्ना न थे

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Aur Bhi Dukh Hain Zamane Men Mohabbat Ke Siva
Rahaten Aur Bhi Hain Vasl Ki Rahat Ke Siva

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Aur Kya Dekhne Ko Baaqi Hai
Aap Se Dil Laga Ke Dekh Liya

और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Dil Na-umiid To Nahin Nakam Hi To Hai
Lambi Hai Ġham Ki Shaam Magar Shaam Hi To Hai

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Donon Jahan Teri Mohabbat Men Haar Ke
Vo Ja Raha Hai Koi Shab-e-ġham Guzar Ke

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Duniya Ne Teri Yaad Se Begana Kar Diya
Tujh Se Bhi Dil-fareb Hain Ġham Rozgar Ke

दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Gulon Men Rang Bhare Baad-e-nau-bahar Chale
Chale Bhi Aao Ki Gulshan Ka Karobar Chale

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Ham Parvarish-e-lauh-o-qalam Karte Rahenge
Jo Dil Pe Guzarti Hai Raqam Karte Rahenge

हम परवरिश-ए-लौह-ओ-क़लम करते रहेंगे
जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Ik Fursat-e-gunah Mili Vo Bhi Chaar Din
Dekhe Hain Ham Ne Hausle Parvardigar Ke

इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Ik Tarz-e-taġhaful Hai So Vo Un Ko Mubarak
Ik Arz-e-tamanna Hai So Ham Karte Rahenge

इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज़-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Kar Raha Tha Ġham-e-jahan Ka Hisab
Aaj Tum Yaad Be-hisab Aaye

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Maqam ‘faiz’ Koi Raah Men Jacha Hi Nahin
Jo Ku-e-yaar Se Nikle To Su-e-daar Chale

मक़ाम ‘फ़ैज़’ कोई राह में जचा ही नहीं
जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Na Gul Khile Hain Na Un Se Mile Na Mai Pi Hai
Ajiib Rang Men Ab Ke Bahar Guzri Hai

न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है
अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Na Jaane Kis Liye Ummid-vaar Baitha Huun
Ik Aisi Raah Pe Jo Teri Rahguzar Bhi Nahin

न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूँ
इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Nahin Nigah Men Manzil To Justuju Hi Sahi
Nahin Visal Mayassar To Aarzu Hi Sahi

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Tere Qaul-o-qarar Se Pahle
Apne Kuchh Aur Bhi Sahare The

तेरे क़ौल-ओ-क़रार से पहले
अपने कुछ और भी सहारे थे

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Tumhari Yaad Ke Jab Zaḳhm Bharne Lagte Hain
Kisi Bahane Tumhen Yaad Karne Lagte Hain

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Vo Baat Saare Fasane Men Jis Ka Zikr Na Tha
Vo Baat Un Ko Bahut Na-gavar Guzri Hai

वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था
वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Ye Aarzu Bhi Baḍi Chiiz Hai Magar Hamdam
Visal-e-yaar Faqat Aarzu Ki Baat Nahin

ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम
विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



Zindagi Kya Kisi Muflis Ki Qaba Hai Jis Men
Har Ghaḍi Dard Ke Paivand Lage Jaate Hain

ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में
हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Also Read: Ghalib Shayari